प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना घोटाला: CAG रिपोर्ट से बड़ा खुलासा — युवाओं के साथ धोखाधड़ी, कितना बड़ा स्कैम और क्या बताती है रिपोर्ट

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana – PMKVY) भारत की सबसे बड़ी कौशल प्रशिक्षण योजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य था देश के युवा वर्ग को रोजगार ओर आत्मनिर्भर बनाने के लिए दक्षता और प्रशिक्षण प्रदान करना। सरकार ने इस योजना के तहत लाखों युवाओं को प्रशिक्षित और सर्टिफाइड किया, ताकि वे असंगठित और औपचारिक दोनों क्षेत्रों में बेहतर नौकरी हासिल कर सकें।
लेकिन जब सर्वेक्षण एवं ऑडिट रिपोर्ट (CAG – Comptroller and Auditor General) सामने आई, तो इस योजना से जुड़ा एक बड़ा घोटाला (Scam) उजागर हुआ। रिपोर्ट में कई गंभीर आरोप शामिल हैं कि कैसे लाखों युवाओं को धोखा दिया गया तथा सरकारी धन का उपयोग योजनागत रूप से नहीं हुआ। यह मामला सिर्फ एक छोटी सी गड़बड़ी नहीं है, बल्कि शिक्षा, रोजगार और युवा सशक्तिकरण की सबसे बड़ी पहलों में से एक में घोटाले का खुलासा है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि क्या है प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना घोटाला (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana Scam), CAG रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ है, किन तरीकों से युवाओं को ठगा गया और इसका असर क्या रहा है। लेख में योजनात्मक विवरण, रिपोर्ट के निष्कर्ष, सरकारी प्रतिक्रिया और भविष्य में क्या कदम उठाए जा सकते हैं—इन सभी का विस्तार से विश्लेषण मिलेगा।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना क्या है?
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई थी, जिसका लक्ष्य देश भर के युवाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण प्रदान करना था। यह पहल खासतौर पर बेरोज़गार युवाओं को तकनीकी और व्यवसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार के योग्य बनाकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए थी।
सरकार का दावा था कि इस योजना से:
- लाखों युवाओं को कौशल प्रशिक्षण मिलेगा
- युवाओं को नौकरी मिलने की संभावनाएँ बढ़ेंगी
- आत्मरोज़गार और स्वरोज़गार को बढ़ावा मिलेगा
- आर्थिक क्षमता में सुधार होगा
लेकिन अब सामने आई CAG रिपोर्ट बताती है कि योजना के कार्यान्वयन में गंभीर कमियाँ थीं, और कहीं-न-कहीं युवाओं के साथ धोखाधड़ी भी हुई।
CAG रिपोर्ट का बड़ा खुलासा
जब CAG (Controller and Auditor General of India) ने PMKVY की ऑडिट की, तो रिपोर्ट में कई परेशान करने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट संकेत देती है कि स्कीम के संचालन में काफी असंगतियाँ और भ्रष्टाचार के संकेत मिले।
CAG रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
CAG रिपोर्ट के अनुसार:
- लाखों युवाओं को बिना प्रशिक्षण के प्रमाणपत्र दिए गए– रिपोर्ट बताती है कि कई ऐसे युवा हैं जिन्होंने प्रशिक्षण पूरा नहीं किया आज भी उन्हें सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया।
- भ्रामक मूल्यांकन और रिकॉर्ड में गड़बड़ी– प्रशिक्षण केंद्रों ने ट्रैक रिकॉर्ड और पासिंग रेट में हेराफेरी की, जिसके कारण नकली प्रमाणपत्र और अप्रमाणित प्रशिक्षण के प्रमाण के आधार पर भी पैसे जारी किए गए।
- धोखाधड़ी या भुगतान में अनियमितता की आशंका– जब प्रशिक्षण और सत्यापन प्रणाली कमजोर हो, तो धन का दुरुपयोग संभव हो जाता है। कई रिकॉर्ड में प्रशिक्षण का कोई प्रमाण नहीं था, फिर भी धन का भुगतान कर दिया गया।
- प्रशिक्षण केंद्रों की निगरानी का अभाव– CAG रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार ने प्रशिक्षण केंद्रों की निगरानी और ऑडिट पर्याप्त रूप से नहीं किया। इसका सीधा असर यह हुआ कि कई केंद्रों ने बिना उचित प्रशिक्षण और निरीक्षण के प्रमाण पत्र जारी किए।
ये निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि योजना का मूल उद्देश्य—यानी युवा सशक्तिकरण—भारी भ्रष्टाचार के कारण प्रभावित हुआ और योजनात्मक लक्ष्य पूरे नहीं हो पाए।
SCAM के प्रकार और युवाओं को धोखा
सामान्यतः इस घोटाले/असंगतियों को निम्न रूप में देखा जा सकता है:
- अधिक प्रमाणपत्र, कम वास्तविक प्रशिक्षण– कई प्रशिक्षण केंद्रों ने आवश्यक प्रशिक्षण अवधि से पहले ही प्रमाणपत्र जारी कर दिये जिन्हें सरकारी भुगतान के लिए दर्ज किया गया।
- शिकायतें और ट्रेनिंग रिकॉर्ड में गड़बड़ी– कई ऐसे मामले मिले जहाँ युवाओं ने शिकायत दर्ज की कि उन्हें प्रशिक्षण केंद्रों से आवश्यक कोर्स नहीं दिया गया, लेकिन फिर भी रिकॉर्ड में पासिंग सर्टिफिकेट देखा गया।
- भुगतान और सत्यापन प्रणाली की कमजोरियाँ– कई प्रशिक्षण केंद्रों ने भुगतान के लिए गलत डॉक्यूमेंट अपलोड किए, वास्तविक प्रशिक्षण के प्रमाण बिना ही सरकार से भुगतान प्राप्त किया गया।
- फ़र्जी डेटा और रिकॉर्ड– कुछ स्थानों पर तो प्रशिक्षण की वास्तविक मौजूदगी का कोई प्रमाण नहीं था, फिर भी उन्हें सूचीबद्ध करके भुगतान किया गया।
इन सभी असंगतियों ने योजनागत धन और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का मार्ग प्रशस्त किया।
युवा वर्ग पर इसका प्रभाव
यह घोटाला सिर्फ एक कागज़ी गलती नहीं है, बल्कि इसके परिणाम युवाओं के जीवन और करियर पर भी गहरे प्रभाव डालते हैं। इसके प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं:
- भरोसे का नुकसान– जब योजनाओं का संचालन भ्रष्टाचार या त्रुटिपूर्ण तरीके से होता है, तो लाभार्थी युवाओं का सरकार पर से विश्वास कम होता है।
- ट्रेनिंग की गुणवत्ता पर सवाल– यदि प्रशिक्षण केंद्र नकली प्रमाणपत्र देता है, तो प्रशिक्षण की गुणवत्ता और मुख्य उद्देश्य ही कमजोर हो जाता है।
- रोज़गार के अवसरों में कमी– सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी पाने वाली जगहों पर युवा बिना वास्तविक कौशल के असफल अनुभव कर सकते हैं।
- संसाधनों का दुरुपयोग– सैकड़ों करोड़ रुपये का उपयोग युवा सशक्तिकरण के स्थान पर भ्रष्टाचार में चला गया, जिससे असली जरूरतमंदों तक मदद नहीं पहुंच पाई।
इसका असर केवल आज के युवाओं नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ी पर भी पड़ेगा, जिनका कौशल विकास और करियर “वादा किया गया लक्ष्य” पूरा नहीं हो सका।
सरकार की प्रतिक्रिया
CAG रिपोर्ट के सामने आने के बाद सरकार ने कहा है कि वह इस मामले की गहन जाँच करेगी। कई स्थानों पर प्रशिक्षण केंद्रों के खिलाफ जांच शुरू की गई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
सरकार की ओर से कहा गया है कि इस तरह की अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा और नीति निर्माण के स्तर पर सुधार लाया जायेगा, ताकि आने वाले समय में ऐसी योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी और जवाबदेह हो।
सरकार ने यह भी कहा है कि लाभार्थियों को उचित प्रशिक्षण और मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेशन मिलेगा, और अगर कोई प्रमाणपत्र गलत तरीके से जारी हुआ है, तो उस पर पुनर्विचार किया जायेगा।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना भारत के युवाओं के लिए एक स्वर्णिम अवसर थी—क्योंकि यह उन्हें रोजगार, कौशल और आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाती है। लेकिन जब CAG रिपोर्ट जैसी गंभीर ऑडिट रिपोर्ट में इस तरह के खुलासे सामने आते हैं, तो यह योजना के मूल उद्देश्य पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर देती है।
यह स्पष्ट है कि योजना के संचालन और निगरानी में कई कमियाँ हैं जो युवाओं और सरकारी संसाधनों दोनों के हितों के खिलाफ हैं। सरकारी धन का दुरुपयोग और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में गिरावट, युवाओं के भविष्य को प्रभावित करती है और इससे सरकार की योजनाओं पर विश्वास को भी झटका लगता है।
हालाँकि सरकार ने जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है, पर युवा वर्ग और समाज को उम्मीद है कि
भविष्य में ऐसी योजनाओं की निगरानी, पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणात्मक प्रशिक्षण प्रक्रिया को मजबूत बनाया जाये ताकि वास्तविक रूप से देश के युवाओं को ही वे लाभ मिलें जिनके लिए यह योजना शुरू की गयी थी।



